

रिपोर्टर राजकुमार हमीरपुर अखंड भारत
स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर दर दर भटक रहे लाभार्थी
मौदहा हमीरपुर। प्रधानमंत्री की गरीबों को छत देने की सबसे महत्वपूर्ण योजना पीएम आवास योजना शहरी की सैकड़ो फाईलें तहसील, नगरपालिका और डूडा कार्यालय में पडी धूल फांक रही हैं जबकि योजना का लेने की आस लगाए गरीब लाभार्थी स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर कार्यालयों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर हैं।
लोकसभा चुनाव के काफी पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में योजना का लाभ और पक्की छत की उम्मीद से लोगों ने प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के लिए आवेदन किए थे जिनकी जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थियों के खाते में घर बनवाने के लिए पहली किश्त आना थी तभी लोकसभा चुनावों की आचार संहिता लागू होने के साथ योजना भी ठण्डे बस्ते में चली गई।
लोकसभा चुनावों के बाद एनडीए सरकार में तीसरी बार नरेंद्र मोदी ने पीएम बनने के बाद फिर से लोगों में पक्का घर की उम्मीद जगाई और लाभार्थियों से आन लाईन आवेदन मांगे गए। लगभग दस महीने पहले हुए आवेदनों पर नगरपालिका, लेखपाल और फिर नायब तहसीलदार द्वारा आवेदन पत्रों की स्थलीय जांच की गई। लेकिन जांच के बाद लाभार्थियों के आवेदन पत्रों की स्टेटस रिपोर्ट पर विरोधाभास है। कुछ लाभार्थियों के स्टेटस रिपोर्ट में आवेदन पत्र नगरपालिका में दिखाया जा रहा है। जबकि नगरपालिका के जिम्मेदारों का कहना है कि हमारे यहां से फाईल तहसील जाती है तभी लेखपाल जांच करता है इसलिए हमारे पास कोई फाईल नहीं पडी है जबकि नायब तहसीलदार महेंद्र गुप्ता ने बताया कि हमारे द्वारा सभी जांच की गई फाईलें डूडा कार्यालय हमीरपुर भेज दी गई हैं। यदि नायब तहसीलदार की बात को सही माने तो स्टेटस रिपोर्ट नगरपालिका दर्शाना कहीं न कहीं विरोधाभास को उजागर करता है। वहीं नगरपालिका द्वारा फाईलें तहसील भेजी गई जिनकी दोबारा जांच तहसील द्वारा की गई तो फिर गेंद डूडा के पाले में जाती है।
फिलहाल उक्त मामले में सभी विभाग अपना बचाओ कर दूसरे विभाग के पाले में गेंद डाल रहे हैं लेकिन इस भंवर में लाभार्थी फंस कर सभी विभागों के चक्कर लगाने के लिए मजबूर हैं।